साई मुझे कदमो में जगा शाम सेहर दे

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॥ पावन पाठ ॥

साई मुझे कदमो में जगा शाम सेहर दे,

खाली है तेरे सामने दामन इसे भरदे,

साई मुझे कदमो में जगा शाम ओ सेहर दे,

तेरी याद में रह के मैं हर एक सेह को भुला दू,

खतरों से भी खेलु तू हर एक बेह को भुला दू,

हर काम से पहले मेरा ये काम तो करदे,

साई मुझे कदमो में जगा शाम ओ सेहर दे,

हर और अंधेरो ने मुझे गेर लिया है,

अपनों ने भी गेरो ने भी मुँह फेर लिया है,

तू है जो हटा सकता है तकदीर के परदे,

साई मुझे कदमो में जगा शाम ओ सेहर दे,

निर्बल पे तू तो दुनिया का सितम देख रहा है,

इंसान समजता है के इंसान खुदा है,

इंसान की शक्ति में तू थोड़ा सा तो डर दे,

साई मुझे कदमो में जगा शाम ओ सेहर दे,

माना मैं तुझसे दिल के सिवा दे नहीं सकता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।