मेरा साईं हजारो में एक है

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॥ पावन पाठ ॥

ओ दीवाने तू क्या जाने तू क्या जाने ओ दीवाने,

ओ दीवाने तू क्या जाने रजा हहिकत को,

मेरा साईं हज़ारों में एक है..

शोहरत है साईं जी की ज़मीन आसमान में,

साईं का डंका भजता है सारे जहां में,

मेरा साईं हजारो में एक है ....

एह भगतो देख लो ये है साईं का मरतबा,

दुनिया के कौन कौन से आती है ये सदा,

मेरा साईं हजारो में एक है ....

सब अपने अपने सूबे के है चीफ मिनिस्टर,

शिरडी में रहता है सबका प्राइम मिनिस्टर,

मेरा साईं हजारो में एक है ....

सूफी का इस लिए तो मिला है उन्हें ख़िताब,

शिर्डी के साईं राम का नही कोई जवाब,

मेरा साईं हजारो में एक है ....

मस निजामी तेरे दर के गुलाम है,

तेरे कर्म से साईं ज़माने में नाम है,

मेरा साईं हजारो में एक है ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।