सोना सोना मेरा साईं

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॥ पावन पाठ ॥

किरपा मेरे साईं की मुझपर अब कुछ भी नही होना,

शिरडी वाले से रोशन है मन का कोना कोना,

सोना सोना मेरा साईं सोना सोना मेरा बाबा...

चाँद हसी है लेकिन वो भी तुझसा नही हो सकता,

तेरे मुखड़े से अच्छा कोई मुखड़ा हो नही सकता ,

मेरे साईं की सूरत वस् गई है दिल के मंदिर में,

कोई भी संसार में मेरे साईं जैसा नहीं है,

सोना सोना मेरा साईं सोना सोना मेरा बाबा

साईं मेरा ऐसा सुंदर क्या क्या लीला दिखाये,

कभी दिखे वो राम की मूरत कभी वो मुरली बजाये,

साईं तेरी शरण में आके रब का दर्शन करलू,

मेरा साईं बाबा मेरा बेडा पार लगाये,

सोना सोना मेरा साईं सोना सोना मेरा बाबा...

सारे जग में साईं जी की किरपा देख रहा हु,

मुझपे भी कर दीजिये नजरियाँ मैं भी दर्द खड़ा हु,

मेरा साईं भरने वाला सारे जग की झोली,

मैं ही नही एक जग में तनहा सारी दुनिया बोली.

सोना सोना मेरा साईं ............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।