दिल साई का मंदिर है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दिल साई का मंदिर है,

जरा गौर से देखो,

बस सोच का चकर है जरा गौर से देखो,से

दिल साई का मंदिर है,

सागर में समा जाने को बेचैन बहुत जो हु,

वो खुद ही समुन्दर है जरा गौर से देखो,

दिल साई का मंदिर है,

आया है जो इस बार मेरी चीख को सुन कर,

ओरो से वो हटकर है जरा गौर से देखो,

दिल साई का मंदिर है,

देहलीज पे देखो तो सही कौन खड़ा है,

वो प्यासा है के बराई है जरा गौर से देखो,

दिल साई का मंदिर है,

सीने से लगा रखा है हीरे की कनि को,

पत्थर है ये पत्थर है जरा गौर से देखो,

दिल साई का मंदिर है,

बहार से भी लेता वो अंदर की तलाश,

बहार को भी बेहतर है जरा गौर से देखो,

दिल साई का मंदिर है,

तुम जुलम को देखो तो कभी शोर न करना,

चुप रहना ही बेहतर है जरा गौर से देखो,

दिल साई का मंदिर है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।