नवनाथों जैसी भक्ति न

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

नवनाथों जैसी भक्ति न मिली तो क्या हुआ,

जीवन में कुछ भी और न मिला तो क्या हुआ,

सतगुरु आप तो मिल गए,

बाबा आप तो मिल गए,

हिरदये में तुम मेरे बस गए,

आप के वचन मेरे शब्द बन गए,

मेरे बोल तुम्हारे गीत बन गए,

सतगुरु आप तो मिल गए,

बाबा आप तो मिल गए,

अब कोई और प्रीत मिले न मिले,

अब कोई और राह मिले न मिले,

शिरडी की राह तो मिल गई,

बाबा आप तो मिल गए ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।