तूने कहा था जो मेरे दर पे आता है

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॥ पावन पाठ ॥

तूने कहा था जो मेरे दर पे आता है,

मालिक की किरपा से हर दुःख मिट जाता है,

आज मैं आया शरण में तेरी,

अब तो सुनलो विनती मेरी,

सुना है दुखियो को तू गले लगता है,

तूने कहा था जो मेरे दर पे आता है,

हिन्दू मुसलमाँ सिख इसाई सभी लाल तेरे है भाई भाई,

अमृत की वर्षा तू सबपे वरसाता है,

तूने कहा था जो मेरे दर पे आता है,

मृत्यु भी भक्तो की तूने थी टाली,

तेरी अधाये सबसे निराली,

तभी तो साईं तू साईं कहलाता है,

तूने कहा था जो मेरे दर पे आता है,

शरधा सबुरी जिस में हो साईं उसपे रहमत तूने लुटाई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।