जे तू अखियाँ दे सामने नही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जे तू अखियाँ दे सामने नही रेहना ते श्यामा सडा दिल मोड़ दे,

घर बेठी सजना भरोसा तेरे प्यार ते,

रोड़ बेठी दिल मैं ता तेरे एतवार ते,

असा नित दा विशोड़ा नही सहना,

असा नित दा विशोड़ा नही सहना,

के श्यामा सदा दिल मोड़ दे...

तेनु चाहिदे ने दिल वाले भेद खोलने,

असा तेरे नाल कई दुःख सुख फोलने,

साडे कोल नि तू घडी पल बहना,

ते श्यामा सडा दिल मोड़ दे,

जे तू अखियाँ दे सामने नही रेहना

मैं जान के चीज बेगानी नु क्यों अपनी चीज बना बेठी ,

दिल लाके तेरे नल बे दर्दा दा मैं उमर दी चिंता ला बेठी,

अस्सा रोज रोज तेनु नहियो कहना,

के श्यामा सडा दिल मोड़ दे,

जे तू अखियाँ दे सामने नही रेहना

तेरी मर्जी आ साडे नालो वख होण दी ,

सादी मर्जी है तेरे पीछे कख हों दी,

दुःख पिछला जोगी सहनु गहना,

के श्यामा सडा दिल मोड़ दे,

जे तू अखियाँ दे सामने नही रेहना

इंज दूर दूर रह के नहियो झट लंगना,

असा दीद बिना नही कुछ होर मंगना,

एवी निक्का जेहा मन्ना नि कहना,

के श्यामा सडा दिल मोड़ दे,

जे तू अखियाँ दे सामने नही रेहना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।