गरीबो के दाता हो अगर तुम मुरारी

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॥ पावन पाठ ॥

गरीबो के दाता हो अगर तुम मुरारी ,

मेरी पार नैया लगानी

पड़ेगी जो तुमने करोडो की बिगड़ी सवारी,

मेरी पार नैया लगानी पड़ेगी,

गुजरा न होगा अगर तू ख़फ़ा है,

अगर तू मेरा है तो बेशक नफा है,

मैं सदियों से तेरे हु दर का भिखारी,

मेरी पार नैया लगानी पड़ेगी...

तू भंगार है यु सुना है दया का शहंशा है सारे यहां का,

क्या तोहीं होगी दया की तुम्हारी,

मेरी पार नैया लगानी पड़ेगी...

ज़माने के मालिक मेरी अर्जु है,

तुम्ही से ओ सवालियां मेरी गुफ्त गु है,

खता कौन कशी की सुध क्यों विसारी,

मेरी पार नैया लगानी पड़ेगी..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।