अब क्यों न दर्श दिखाए दातिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं खड़ा द्वारे कबसे दर्शन को नैना तरसे,

अब नैन मेरे पथराये दातिए,

मैं आस लगा के आया श्रद्धा के फूल लाया,

अब क्यों न दर्श दिखाए दातिए,

मैं बालक हु माँ तेरा मैंने तुझको ही माना,

मेरी आंख खुली माँ जबसे माँ बस तुमको ही जाना,

मैं खरा हु चाहे खोटा पर हु माँ तेरा बेटा,

अब दिल ये मेरा गबराये दातिए,

तू ममता मई है माता तेरा दिल ममता का सागर,

मैं जोड़े हाथ खड़ा हु द्वारे पे तेरे आ कर,

तेरी महिमा बड़ी निराली तू मैया शेरा वाली,

अब क्यों न गले लगाए दातिए,

मैं मांगू हीरा पना मैं चाहु चांदी सोना,

पर गिरी मैं सबसे पहले मांगू भक्ति का गहना,

बस एक नजर माँ डालो,

चरणों से अपने लगा लो,

ये लाल तेरा कहलाये दातिए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।