साई भरोसे चल रे मुसाफिर

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॥ पावन पाठ ॥

साई भरोसे चल रे मुसाफिर साई भरोसे चल,

मंजिल खुद चल कर आयेगी,

आज नहीं तो कल,

साई भरोसे चल रे मुसाफिर साई भरोसे चल,

रस्ते में कुछ मोड़ आएंगे तेरी हिमत तोड़ आएंगे,

अपना सफर आसान बना ले हर मुश्किल कर उसके हवाले,

उसकी तरफ जो देखेगा तू तेरी तरफ वो देखे हर पल.

आज नहीं तो कल,

साई भरोसे चल रे मुसाफिर साई भरोसे चल,

चलता जा तू ख़ामोशी से कोई न रख उम्मीद किसी से,

साई साधना रंग लाये गी,

एक दिन तेरे काम आएगी,

मन की आंख से देख सकेगा,

तन की आँख से है जो ओझल,

आज नहीं तो कल,

साई भरोसे चल रे मुसाफिर साई भरोसे चल,

जब दरवाजा बंद मिलेगा ध्यान से ही आनद मिले गा,

अगर नहीं तेरे पास सबुरी तेरी तपस्या रहे अधूरी,

साई द्वार पे झुक के देखले,

मिट जायेगा कर्मो का फल,

आज नहीं तो कल,

साई भरोसे चल रे मुसाफिर साई भरोसे चल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।