ओ जी ओ पाबूजी थोरी

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॥ पावन पाठ ॥

ओ जी ओ पाबूजी थोरी केसर घूघरिया या गमक्कावे ओ पाबूजी,

आ तो भगतों रे हित कारणे ,

पाबूजी भुरजाला थे हो भगतों र रखवाला.....

ओजीओ पाबूजी सुता सुख भर महलो नींद आ पाबूजी,

गोंडी केसर ने रमाई थे तो साथ मे,

देवल रे घर जावे पाबु केसर ले कर आवे,

ओजीओ पाबूजी जावो अमर कोट रे मोय ओ पाबूजी,

संग सोढ़ी रे राणी सु रच्यो ब्याव जी ,

गाया खिंची गेरी पाबु देवल दौड़ी आई,

ओजीओ पाबूजी जावो गायो वाली वॉर ओ पाबूजी,

थे तो धर्म निभायो देवल बहन रो,

गाया पाछी लावो पाबु टोगड़िया मिलावो,

ओजीओ पाबूजी गुण नेनु रे देवासी थोरा गावे ओ पाबूजी,

कोई कोलूमण्ड में आयने ,

सरणे माने लीजो पाबु दर्शन माने दिजो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।