दिल से जो निकली सदा येही आई,

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन साईं भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दिल से जो निकली सदा येही आई,

होठ खुले तो बोलू मैं साई साई,

भोर बाई है देखो पंछी भी जागे उड़ उड़ के तेरे दर पे है भागे,

पवन के झोके बजाये शहनाई,

होठ खुले तो बोलो मैं साई साई,

साई राम साई राम साई राम ...

साई श्याम साई श्याम साई श्याम....

तेरा नगर है साई सबसे निराला,

बरसता है पल पल उसकी का उजाला.

गली गली इठलाके चले पर्वाही,

होठ खुले तो बोलो मैं साई साई,

साई राम साई राम साई राम ...

साई श्याम साई श्याम साई श्याम....

यहाँ जो भी ए बाबा तेरा हो जाये,

तेरे दर पे आके सुध बुध विसराये,

तेरे नाम के सिवा कुछ न दे सुनाई,

होठ खुले तो बोलो मैं साई साई,

साई राम साई राम साई राम ...

साई श्याम साई श्याम साई श्याम....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।