वक़्त तो लगता है

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॥ पावन पाठ ॥

वर्षो पाप किये है हमने छुपके चोरी चोरी,

इतने पापो को धोने में वक़्त तो लगता है,

पावन और निर्मल होने में वक़्त तो लगता है,

इतने पापो को धोने में.....

हमने नफरत के पौधों को जीवन में सीचा,

प्रेम के बीज यहाँ बोने में वक़्त तो लगता है,

इतने पापो को धोने में......

एक दो चार नहीं तेरी मांगे मांग हज़ारो है,

इतनी चाहत को पाने में वक़्त तो लगता है,

इतने पापो को धोने में.....

दुनिया के चक्कर में फसा तू मोह के फंदे में,

घर से इस दर तक आने में वक़्त तो लगता है,

इतने पापो को धोने में ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।