मुकुट सिर मोर का

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का ll

दो नैना कारे कारे, दो नैना कारे कारे,

दो नैना घनश्याम के, कटीले है कटार से ll

मुकुट सिर मोर का,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मारे गए हैं हम तो, नैनो के वार से,

घायल हुआ है जिगरा, पलकों की धार से ll

जाएंगे जिन्द मार के, कहें दिल पुकार के ll

दो नैना कारे कारे, दो नैना कारे कारे,

दो नैना घनश्याम के, कटीले है कटार से ll

मुकुट सिर मोर का,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इक्क तो कटीले नैना, दूजे नशीले,

होश में आए ना जो, इक्क वार पी ले ll

गए दिल हार ये, नैनो के टकरार से ll

दो नैना कारे कारे, दो नैना कारे कारे,

दो नैना घनश्याम के, कटीले है कटार से ll

मुकुट सिर मोर का,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

दिल में वसा लूँ वैरन, ज़ुल्मी निगाहों को,

मोहिनी सूरत तेरी, हर इक्क अदाओं को ll

गज़ब श्रृंगार ये, हुआ है हमे प्यार ये ll

दो नैना कारे कारे, दो नैना कारे कारे,

दो नैना घनश्याम के, कटीले है कटार से ll

मुकुट सिर मोर का,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इक्क टक्क निहारूं तुझे, मेरा अरमान है,

शर्मा का इन नैनो में, दोनों जहान हैं ll

किया है दीदार ये, भूला हूँ संसार ये ll

दो नैना कारे कारे, दो नैना कारे कारे,

दो नैना घनश्याम के, कटीले है कटार से ll

मुकुट सिर मोर का,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

अपलोड करता- अनिल भोपाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।