साईं दे रंग विच मैं रंगीला

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कोई रंग सादा कोई रंग पीला,

साईं दा दर है बड़ा सजीला,

साईं दे रंग विच जो वी रंगियाँ,

वो तो कहंदा है,

साईं दे रंग विच मैं रंगीला ,

आपे रांजा बने मेनू हीर बनावे,

साईं दाता मेरी तकदीर बनावे,

दर तो तेरे आके बंदा बंदा कहंदा है,

साईं दे रंग विच मैं रंगीला...

दिल करदा है तेरे दर ते आवा,

मन दिया मुरदा तेथो पावा,

जो तेरा हो जांदा है ओ दुःख नि सह्न्दा,

साईं दे रंग विच मैं रंगीला ,

कदमा दे विच सिर नु मैं रखा तेरे नाम डा प्याला साईं मैं चखा,

दुनिया कुछ वि बोले मेनू फर्क नि पेंदा है,

साईं दे रंग विच मैं रंगीला ,

साईं बिक्षा देदे तू फ़कीर नु,

अब अपना बना ले तू समीर नु,

दर दर ढूंढे सारे ओ मेरे दिल विच रहंदा है

साईं दे रंग विच मैं रंगीला ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।