आता रहु गाता रहु

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आता रहु गाता रहु मेरे बाबा तुझको रिजाता रहु,

दिलकी तमाना है येही मेरी मैं देखु तुझे मुस्कुराता राहु,

आता रहु गाता रहु.....

दाता तेरे दरबार में हर पल खुशियों के बरमार है,

मन को मेरे बाहता है तू मुझको तेरी दरकार है,

सुनता है तू मन की मेरे आके मैं तुझको सुनाता रहु,

दिल की तमना है येही मेरी मैं देखु तुझे मुस्कुराता रहु,

आता रहु गाता रहु....

तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं पहचान मेरी है तुझसे प्रभु,

तूने किये उपकार जो एहसान तेरे है मुझपे प्रभु,

मालिक मेरे महाजन मेरे चरणों में सिर को झुकता रहु,

दिल की तमना है येही मेरी मैं देखु तुझे मुस्कुराता रहु,

आता रहु गाता रहु....

पथ में तेरे जो प्रेमी मिले अपनों से बढ़ कर वो अपने लगे,

देखु जिधर लगता है यु सारे के सारे है मेरे सगे,

बिनु को जो तू दे रहा वो भाव इन पे लुटाता रहु,

दिल की तमना है येही मेरी मैं देखु तुझे मुस्कुराता रहु,

आता रहु गाता रहु....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।