साईं से जा के मांग ले

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॥ पावन पाठ ॥

साईं से जा के मांग ले सच्चा हजूर है,

खाली नही लौटाएगा किस्सा मशहुर है,

भूखा किसी को साईं रखता कभी नही,

माँगा है जिसने जो बी उस को मिला वही,

तु मांग के तो देख देता जरुर है

साईं से जाके मांग ले......

उजड़े को अपनी कमली में साईं छुपता है,

दुखिया के कष्ट हरने को दर पे भुलाता है,

तू भी तो जाके देख लो कैसा हजुर है,

साईं से जा के मांग ले.......

मैं भी तो तेरा दीप हु पानी भरा हुआ,

कर दो मुझे भी रोशन इतनी है बस दुआ,

तेरे नाम के साईं ये कैसा सरुर है,

साई से जा के मांग ले........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।