श्याम जी मोहे रंग दीना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम जी मोहे रंग दीना अपने ही रंग में मोहे रंग देना,

देखु जिधर कन्हाई तू ही तू दे दिखाई ऐसा जादू कर दीना,

मोहे रंग दीना.....

जब से यदि श्याम चदरियाँ बन बन ढोलू बनके वावरियाँ,

चढ़ी प्रेम की सूली दुनिया को मैं भूली,

छलिये को भूल स्की न,

मोहे रंग दीना.....

भूल गई मैं हसना रोना,

जबसे मिला मुझे श्याम सलोना,

रंग डाला जीवन को मेरे फूल से मन को अपने वश में कर लीना,

मोहे रंग दीना.....

आँख खुली और टूटा सपना,

समज गई मैं तुहि है अपना,

दो दिन का है मेला छूटा जगत का झमेला,

बेधड़क है कुछ भी कही न,

मोहे रंग दीना.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।