तुम मुझे यु जला ना पाओगे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तुम मुझे यु जला ना पाओगे,

जली लंका मेरी जला मैं भी,

एक दिन तुम भी जलाये जाओगे,

तुम मुझे यु जला ना पाओगे,

मैंने सीता हरी हरी के लीये,

रक्षक कुल की बेहतरी के लीये,

मैंने प्रभु को रुलाया वन वन में,

तुम प्रभु को रुला न पाउगे,

जली लंका मेरी जला मैं भी......

आज रावण से राम डरते है,

लगन ही सीता हरण करते है,

आज घर घर में छुपे है रावण,

आग किस किस को भला लगाओ गे,

तुम मुझे यु जला ना पाओगे,

जली लंका मेरी जला मैं भी,

सीता हरना तो एक बहाना था,

मुझको दर्शन प्रभु का पाना था,

मैंने मर कर के पाया प्रभु जी को.,

जिन्दा रह कर जो तुम न पाउगे

तुम मुझे यु जला ना पाओगे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।