ये कर्म तेरे ये कर्म तेरे

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ये कर्म तेरे ये कर्म तेरे यह मनवा के वेहवार तेरे,

ये जीवन के आधार तेरे,

सब जेवो में उस मालिक ने क्यों तुझको सरेष्ठ बनाया है,

तुम भला बुरा पहचान सको ये गुण भी तुझमे समाया है,

भव सिंधु में तेरी नैया के सतकर्म सदा पतवार बने,

ये जीवन के आधार तेरे,

ये कर्म तेरे ये कर्म तेरे.....

ये सोच समज ये भावुक काम पशुयो को प्रभु ने क्यों न दी,

ये दया धर्म धीरज ज्योति तुझमे ही भला काहे भर दी,

तेरे अंदर ये गुण तेरे सद ज्ञान का ही संचार करे,

ये जीवन के आधार तेरे,

ये कर्म तेरे ये कर्म तेरे.....

बस यही अर्ज तुमसे मेरी शुभ कर्म सदा करते रहना,

दीनो की सदा सेवा करना सत के पख पे चलते रहना,

ये हर्ष तुझे तेरे कर्मो से आखिर एक दिन करतार मिले,

ये जीवन के आधार तेरे,

ये कर्म तेरे ये कर्म तेरे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।