ये माटी में मिल जाएगी

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॥ पावन पाठ ॥

ये माटी में मिल जाएगी,

मिल जाएगी रे बन्दे कंचन काया कंचन काया,

उस मालिक ने सब जीवो में तुझको सरेष्ठ बनाया है.

मोह माया में फस कर तूने जीवन व्यर्थ गवाया है,

सात कर्मो के खातिर तूने पाई है बन्दे कंचन काया,

ये माटी में मिल जाएगी.....

हर पल तेरी सांसे घटती जीवन एक जलमेला है,

जगत जाल में आन फसा तू खुद को ऐसा बोला है,

समजा है तूने इसको अपना पराई है रे बन्दे,

कंचन काया हो कंचन काया,

तेरी मेरी करते करते निकल गए दिन ये तेरे,

सिर पे लादे पाप की गठरी काहे भटक ता तू प्यारे,

हर्ष रहे न यु ही हमेशा सवाई तेरे बंदे,

कंचन काया कंचन काया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।