वरदान यही दे दो

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॥ पावन पाठ ॥

वरदान यही दे दो मेरे सतगुरु सुखदाते ,

बीते ये मेरा जीवन तेरे गुण गाते गाते,

तेरी सूरत सुख्हानी नैनो मैं बस जाये,

आँखों को बंद कर लू दूजा न नज़र आये,

जो दास बने तेरा दुःख उस के मिट जाते,

वरदान यही दे दो........

एन पावों से चल कर तेरे मंदिर में आऊ,

हाथो से करू सेवा मन से से तुझको धयाऊ,

सतनाम साक्षी मंतर सिमरु पीते खाते,

वरदान यही दे दो मेरे सतगुरु सुखदाते ,

गुरु देव तेरी किरपा जिस पर भी बरस जाये,

दुःख दर्द की छाया भी उस पर कभी छाए,

जो दास बने तेरा दुःख उसके मिट जाते,

वरदान यही दे दो मेरे सतगुरु सुखदाते ,

Gurudev swami Shree teuraam ji ki jai

From....Babita Sikhini 9729376232

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।