या ते मर मिट जाना है साइयाँ

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॥ पावन पाठ ॥

मैं दुनिया दारी छड़ के साइयाँ,

तेरा इश्क़ कमोना है,

या ते मर मिट जाना है साइयाँ या फिर तनु पौने है,

पौना है तनु पौना ऐ,

जिथे तू वसदा दुखा दा उठे हॉवे न एहसास कदे,

तेरी बुकल च सके उठिये ना ओ पल आ जावन काश कदे,

खुश हो लिए तनु चेते कर नहीं ता रोना है,

या ते मर मिट जाना है साइयाँ या फिर तनु पौने है,

सड़ा हाल तेरे बिन इंज साइयाँ जीवे पानी दे बिन मश्ली दा,

तेरा नाम मैं हर था लिख लेना भर रंग फकीरी असली दा,

है चीटी चादर मन मेरा तेरे नाम दा रंग चोडना है,

या ते मर मिट जाना है साइयाँ या फिर तनु पौने है,

तू शहवा दा है शाह साइयाँ तू अली तू मस्त कालंधर है,

तू पीर फ़कीर वी साइयाँ तू वसदा सबदे अंदर है,

तेरे दर दे सजदे करदा रवा लमबे दा एहो चोहना है,

या ते मर मिट जाना है साइयाँ या फिर तनु पौने है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।