साई शरण में आओगे

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॥ पावन पाठ ॥

साई शरण में आओगे तो समजो गे ये बात,

रात के पिशे दिन आवे है दिन के पिशे रात,

कौन खिलाये फूल चमन में क्यों मुरझाये फूल की पाती,

क्यों चमके है बन में दीपक कौन भुजाये जलती बाती,

साई शरण में आओगे तो समजो गे ये बात,

रात के पिशे दिन आवे है दिन के पिशे रात,

कौन भिछाये सुख का बिस्तर,

कौन उड़ाये दुःख की चादर,

क्यों हॉवे पत्थर की पूजा,

कौन करे पत्थर को कंकर,

साई शरण में आओगे तो समजो गे ये बात,

रात के पिशे दिन आवे है दिन के पिशे रात,

क्यों तूफ़ान से निकले कश्ती क्यों मझधार में दुबे नैया,

क्यों साहिल आने से पहले टूटे है तकदीर का पहियाँ,

साई शरण में आओगे तो समजो गे ये बात,

रात के पिशे दिन आवे है दिन के पिशे रात,

कौन करे झोली को खाली कौन भरे है सीप में मोती,

क्यों दिन रात जगाये रखे आंधी में विश्वाश की जोति,

साई शरण में आओगे तो समजो गे ये बात,

रात के पिशे दिन आवे है दिन के पिशे रात,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।