यूँ मुँह ना मोड़ो माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

यूँ मुँह ना मोड़ो माँ,

सुन लो मेरी पुकार,

आ गया आ गया आ गया वो दवार,

यूँ मुँह ना मोड़ो माँ...

बेगाने हो गए अपने थे जो कभी,

टूटी नहीं फिर भी दिल की मेरे नदी,

तुम तो न रूठो माँ सब से गया मैं हार,

आ गया आ गया आ गया वो दवार,

यूँ मुँह ना मोड़ो माँ...

साखो से तोड़ के मुझको न फेंको,

बस एक दफा तो मेरी और देखो माँ,

यु दिल न तोड़ो माँ लेहरी शरण तुहार,

आ गया आ गया आ गया वो दवार,

यूँ मुँह ना मोड़ो माँ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।