रोती हुई आँखों को

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रोटी हुई आँखों को तूने ही हसाया है,

तू ने इस जीवन को जीना भी सिखाया है,

रोती हुई आँखों को तूने ही हसाया है,

चौ और मुशीबत थी घर में भी फजीयत थी,

उस वक़्त मुझे बाबा तेरी ही जरुरत थी,

भुजते हुए दीपक को तूने ही जलाया है,

तू ने इस जीवन को जीना भी सिखाया है,

लाचार थे हम इतने खुद से भी हारे थे,

इक तेरे भरोसे पे अरमान हमारे थे,

कर्जे में दबे थे हम हमे सेठ बनाया है,

तू ने इस जीवन को जीना भी सिखाया है,

इतने एहसान तेरे मोहित क्या बतलाये,

रेहमत का तेरी मोहन वो व्याज ना दे पाए,

मुझ जैसे पत्थर को कोहिनूर बनाया है,

तू ने इस जीवन को जीना भी सिखाया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।