साई के उजालो मेरे साई के उजालो

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॥ पावन पाठ ॥

साई के उजालो मेरे साई के उजालो,

आखो में सिमट आउ अंधरों को निकालो,

साई के उजालो मेरे साई के उजालो,

महफ़िल में तेरी आये तो हम एक हुए है,

रस्ते पे तेरे चल के सभी नेक हुए है,

हर पग पे संभाला है तू आगे भी संभालो,

साई के उजालो मेरे साई के उजालो,

बरसो से तुम्हे दिल की नजर घुंड रही है,

जिस घर में छिपे हो वोही घर ढूंढ रही है,

परदो से निकल कर मुझे अंचल में छुपा लो,

साई के उजालो मेरे साई के उजालो,

दुनिया का जब हॉल है इंसान के हाथो,

ऐसा तो न होगा कभी शैतान के हाथो ,

अब चाहो तो आकाश पे धरती को उठा लो,

साई के उजालो मेरे साई के उजालो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।