जितने दिन यु व्यर्थ कटेगे

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॥ पावन पाठ ॥

जितने दिन यु व्यर्थ कटेगे,

फिर न कभी वापिस मिले गे,

जीवन तो है बेहता पानी,

बेहता ही जायेगा......

वादा कर के भी तूने प्यार से उसका नाम कभी ना बोला,

जिसने तुझको किरपा कर के दिया है ये मानव का चोला,

जो तू न राह पे आएगा जीवन भर पश्ताऐगा,

जितने दिन यु व्यर्थ कटेगे.....

सुन ले सुन ले रे ऐ मन मेरे करले,

कुछ तो साधन ऐसा,

पापो का खंड है तेरा जीवन हो जाये,

पवन मंदिर जैसा,

प्रभु की शरण में जो आएगा ऐसा तभी हो पायेगा,

जितने दिन यु व्यर्थ कटेगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।