ओ सोने वाले जाग जा

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॥ पावन पाठ ॥

किस धुन में बैठा बावरे और तू किस मद में मस्ताना है,

ओ सोने वाले जाग जा संसार मुसाफिर खाना है,

ओ सोने वाले जाग.....

क्या लेकर आया था जग में फिर क्या लेकर जायेगा,

मुठ्ठी बांधे आया जग में फिर हाँथ पसारे जाना है,

ओ सोने वाले........

कोई आज गया कोई कल गया कोई चँद रोज में जायेगा,

जिस घर से निकल गया पंछी उस घर में फिर नही आना है,

ओ सोने वाले जाग......

सुत मात पिता बांधव नारी धन धाम यहीं रह जायेगा,

यह चंद रोज की यारी है फिर अपना कौन बेगाना है,

ओ सोने वाले जाग जा.....

कह भिक्षु यती हरि नाम जपो फिर ऐसा समय न आयेगा,

पाकर कंचन सी काया को फिर हांथ मीज पछताना है,

ओ सोने वाले जाग........

। माधव शरण ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।