चिठ्ठिया पावे ते नाले सद्दे आप जी माये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चिठ्ठिया पावे ते नाले सद्दे आप जी माए,

मंग लो मंग लो जी बैठी खोल जी माए।

जिस ने मन्गेआ दाती दे कोलो खाली ना मुड़ेआ,

श्रधा वाले लै के फुल्लां दे हार जी माए॥

अरजा करदा मैं दोवें हाथ जोड़ के माता,

मावा वाला तू देदे मेनू प्यार नी माए ॥

तेरे चरना दी धुल माथे ला लावा दाती,

लाखों तर हाय पा के तेरा प्यार नी माए॥

मैं की जाना माँ तू है जाननहार जग दी,

लुधिआने वाला चंचल आया दरबार नी माए॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।