जो भी आया द्वार तिहरे खाली हाथ न लौटा

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॥ पावन पाठ ॥

जो भी आया द्वार तिहरे खाली हाथ न लौटा,

जिस के सिर पर हाथ तिहारे उसका जीवन पलटा,

एक पल में जो रंक था वो राजा बन कर बैठा,

जिसके सिर पर हाथ तिहारे उसका जीवन पलटा,

साई बाबा ओ साई बाबा.....

साँचा है दरबार तिहारा स्वर्ग का है ये द्वारा,

भक्तो की है भीड़ यहाँ पर साई नाम का नारा,

जानता है तू सभी को साँचा कौन है झूठा,

जिस के सिर पर हाथ तिहरे उसका जीवन पलटा,

साई बाबा ओ साई बाबा.....

लीला तेरी न्यारी उसको कोई जान ना पाया,

जिसने धया तुझको उस पर रही है तेरी माया,

एहम भाव से जो भी आया उसका भरम है टुटा,

जिस के सिर पर हाथ तिहरे उसका जीवन पलटा,

साई बाबा ओ साई बाबा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।