दर्श तेरे जो पाए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर्श तेरे जो पाए तो कुछ हिम्मत हुई है,

बताए कैसे तुझको जुबा खुलती नही है,

सुना कलिकाल में तो बनोगे तुम सहारा,

करोगे रक्षा उसकी तुम्हे जिसने पुकारा,

सजा अब दे तो कैसे समज आती नही है,

बताए कैसे तुझको जुबा खुलती नही है,

दर्श तेरे जो पाए तो कुछ हिम्मत हुई है,

समज पावो तो समजो दुखी दर्दी की बाते हुआ है चाख सीना,

लगी घातों पे घाते दिखाए तुमको कैसे नजर आती नही है,

बताए कैसे तुझको जुबा खुलती नही है,

दर्श तेरे जो पाए तो कुछ हिम्मत हुई है,

मेरी नादानियो को कन्हिया माफ़ करना,

मैं नैया तू खावियाँ सोच इंसाफ करना,

सताए हमको एसे लाज आती नही है,

बताये कैसे तुझको जुबा खुलती नही है.

दर्श तेरे जो पाए तो कुछ हिम्मत हुई है,

टपकते आंसू से सुनो मेरी कहानी,

उबहारो श्याम मेरे कौन तुम सा है दानी,

नंदू पीड़ा हिरदय से सही जाती नही है,

बताए कैसे तुझको जुबा खुलती नही है,

दर्श तेरे जो पाए तो कुछ हिम्मत हुई है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।