निक्का जिहा मंदिर बनाके

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

निक्का जिहा मंदिर बनाके माँ मेरी बह गयी आसन लाके

बह गयी आसन लाके माँ मेरी बह गयी आसन लाके

मंदिर दे विच रामजी आये,

सीता जी नु नाल ले आये,

सीता रूप बनाके माँ मेरी बह गयी आसन लाके,

निक्का.......

मंदिर दे विच श्याम जी आये,

राधा जी नु नाल लेआये,

राधा रूप बनाके माँ मेरी बह गयी आसन लाके,

निक्का.......

मंदिर दे विच भोला जी आये,

गौरा जी नु नाल लेआये,

गौरा रूप बनाके माँ मेरी बह गयी आसन लाके,

निक्का......

मंदिर दे विच विष्णु जी आये,

लष्मी जी नु नाल लेआये,

लष्मी रूप बनाके माँ मेरी बह गयी आसन लाके,

निक्का......

मंदिर दे विच ब्रह्मा जी आये,

सरस्वती जी नु नाल लेआये,

सरस्वती रूप बनाके माँ मेरी बह गयी आसन लाके,

निक्का......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।