रूप गोपी का सूंदर सजा के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रूप गोपी का सूंदर सजा के चले है भोले रास देखने,

मुखड़ा घुंगट में अपना छिपा के चले है भपा रास देखने,

हार नो लाख पहने गले में,

कानो में डोले रे डोले झुमका,

होश उड़े है तीनो लोक के भोले लगाए जब धूमका,

माथे पे बिंदियां कानो में कजरा रत्न रे नैनो में काला कजरा,

लाल होठों पे लाली लगा के चले है बाबा रास देखने,

देख भोले को गौरी मैया रोक हसी ना पाए,

जैसे दुल्हन शर्माती है वैसे ही भोले शर्माए,

छन छन बोले पाँव की पायल करती नैथनिया दिल को पागल,

लाल हाथो में मेंहदी रचा के चले है बाबा रास देखने,

फिर पहुंचे वृद्धावन में भोले देख रहे थे कन्हाई,

पूछे सखी से ओढ़ के घूंघट गोपी कौन आई,

जैसे ही मोहन मुरली बजाई सुध भूद भोले ने विश्राई,

तन पे सोला शृंगार सजाके चले है बाबा रास देखने,

गिर गए भोले विच सखियों के सिर को खड़े है झुकाये,

इस लीला के कारण बाबा गोपेश्वर कहलाये,

बन जाए उसके दर का दीवाना गए ले तू वेधक् दिल से तराना,

धनाये लखा हुआ गन गए के चले है भोले रास देख ने,

मुखड़ा घुंगट में अपना छिपा के चले है भपा रास देखने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।