एक साई तेरे आने से

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

एक साई तेरे आने से मेरे घर में आई बहार है,

जबसे मिला है तेरा सहारा मुझको मिला संसार है,

एक साई तेरे आने से मेरे घर में आई बहार है,

मंदिर देखा मस्जिद देखि गिरजा गुरुदवारा देखा,

जबसे मैंने शिरडी देखि तेरा दर प्यारा देखा,

मेरे साई तेरी रेहमत का जग सारा तलबदार है,

एक साई तेरे आने से मेरे घर में आई बहार है,

सुबह सवेरे आरती हो तो साई के दर्शन पाना,

जो भी तुमको लेना है साई से वो लेकर जाना,

मैंने सुना है मेरे बाबा तेरी लीला अप्रम पार है,

एक साई तेरे आने से मेरे घर में आई बहार है,

शिरडी वाले साई बाबा हमसर का तू सहरा है,

रो रो कर दुखियाँ ने साई दिल से तुझे पुकारा है,

एक साई तेरी रेहमत का जग सारा तालाब दार है,

एक साई तेरे आने से मेरे घर में आई बहार है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।