सुख भी मुझे प्यारे है दुःख भी मुझे प्यारे है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुख भी मुझे प्यारे है दुःख भी मुझे प्यारे है,

छोडू मैं किसे भगवन दोनों ही तुम्हारे है,

दुःख चाहे ना कोई भी सब सुख को तरस ते है,

सुख में सब हस्ते है दुःख में सब रोते है,

सुख मिले जिसे उसने दुःख भी तो सहारे है,

छोडू मैं किसे भगवन दोनों ही तुम्हारे है,

मैं कैसे कहू मुझको ये देदे या वो देदे,

जो भी तेरी मर्जी है मर्जी से जो देदे,

मैंने तो तेरे आगे ये हाथ पसारे है,

छोडू मैं किसे भगवन दोनों ही तुम्हारे है,

सुख में तेरा शुकर करू दुःख में फरयाद करू,

जिस हाल में तुम रखो मैं तुम को याद करू,

यादो में वियोगी ने ये गीत सवारे है,

छोडू मैं किसे भगवन दोनों ही तुम्हारे है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।