मोहबत मसीहा कर्म करने वाले

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॥ पावन पाठ ॥

मोहबत मसीहा कर्म करने वाले,

करदे कर्म तू बाबा ओ साई शिरडी वाले,

साई शिरडी वाले,

तेरे दरबार में जो आता है सवाली है,

बदनसीबों का मेरे आका तू तो वाली है,

हम भी बिगड़ी हुई तकदीर आज लाये है,

तेरे चरणों में हम अपना दामन हम बिछाये है,

तन मन किया है साई तेरे हवाले,

साई शिरडी वाले....

तेरी रेहमत से चाँद और तारे जगमगा ते है,

परिष्ते भी तेरी चौकठ पे सिर झुकाते है,

गुलिस्तां पे तेरी शान और शौकत कायम है,

तेरी सहमत से हर चमन भी मुस्कुराता है.

तू तो है भोला साई मेरे कमली वाले,

साई शिरडी वाले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।