आजा साईं शरण में तू आजा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आजा साईं शरण में तू आजा, दुःख सारे कट जाएंगे।

साईं को मन में बसा ले तू, मन में ज्योत जगाले तू॥

साईं यह मेरा घट घट की है जानता,

साईं की लीला को सारा जग मानता।

आजा साईं शरण में तू आजा,

दुःख सारे कट जाएंगे॥

इक बार डोरी साईं हाथों में तू सौम्प दे,

छोड़ दे भरम झूठे दिल में है जो तेरे।

आजा साईं शरण में तू आजा,

दुःख सारे कट जाएंगे॥

रख विशवास, झूठे जग को तू छोड़ दे,

साईं समाधि पे आजा हाथ जोड़ के।

आजा साईं शरण में तू आजा,

दुःख सारे कट जाएंगे॥

मेरी जान वी तू, ते ईमान वी तू

कण कण विच तू, हर रंग विच तू

मेरा मंदिर तू, मेरी मस्जिद तू

मथुरा वि रु, काशी भी तू

शिर्डी विच तू हर थां विच तू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।