भोला भांग तुम्हारी मैं घोटत घोटत हारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोला भांग तुम्हारी मैं घोटत घोटत हारी,

हमसे ना घोटी जाए तेरी एक दीना की होए तो घोटु रोज ना घोटी जाए,

बम भोला बम भोला बम भोला,

जिस दिन से मैं ब्याह के आई भाग हमारे फूटे,

राम करे ऐसा हो जाये ये सिलबट्टा टूटे,

ये रोज रोज की रगड़ झगड़,

हमसे तो सही ना जाये,

तेरी एक दीना की होए तो घोटु रोज ना घोटी जाए........

नाजुक तन है नाज से पाला कैसे कहु कसाले,

घोटत घोटत भांग तुम्हारी,

हाथ में पड़ गए छाले,

मैं मायके को जाऊँ तो स्वामी अकल ठिकाने आए,

तेरी एक दीना की होए तो घोटु रोज ना घोटी जाए.....

भोलेनाथ माता पारवती को समझाते हुए,

सुन गणपति की महतारी,

तुम घोंटो भांग हमारी,

बिन भांग रहा नहीं जाए,

गौरां तुमको छोड़ दूँ लेकिन भांग ना छोड़ी जाए।

सुन गौरा सुन गौरा सुन गौरा

सुन गौरा सुन गौरा सुन गौरा।

भांग नहीं भगवती है ये घट घट में रहने वाली,

दुष्टो दलों के लिए बानी है काली माह काली,

इसको पीकर ऋषि मुनि नारद भक्ति में ध्यान लगाए,

गौरां तुमको छोड़ दूँ लेकिन भांग ना छोड़ी जाए।

बम भोला बम भोला बम भोला,

बम भोला बम भोला बम भोला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।