राज़ी प्रभु दी राजा दे विच रहिए

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॥ पावन पाठ ॥

राज़ी प्रभु दी राजा दे विच रहिए,

नज़ारा लईए ओहदी मौज दा।

ओहदी मार वी प्यार नाल सहिए,

नज़ारा लईए ओहदी मौज दा॥

जे ओह देवे कंडेआ दी सूली,

सम्जिए उसनू फूलां तो कूली।

सेज फुल्लां दी समझ के सोईए,

नज़ारा लईए ओहदी मौज दा॥

सर मांगे तां सी ना करिए,

ला के सर वोह्दे कदमा च धरिए।

बिना सिरो वी नज़ारा लईए,

नज़ारा लईए ओहदी मौज दा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।