रोके न हमे संसार हमे साई ने भुलाया है

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॥ पावन पाठ ॥

रोके न हमे संसार हमे साई ने भुलाया है,

अब कौन करे इंकार हमे साई ने भुलाया है,

रोके न हमे संसार हमे साई ने भुलाया है,

मिला हमको सन्देश चलो दाता के देश,

पहनो चोला बस एक देखो बदलो न बेस,

लो हमसे बड़ा कर प्यार हमे साई ने भुलाया है,

रोके न हमे संसार हमे साई ने भुलाया है,

क्या ख़ुशी थी ख़ुशी क्या हमे गम का गम,

जब तक है दम में दम चलते जायेगे हम,

अब दूर नहीं दरबार हमे साई ने भुलाया,

रोके न हमे संसार हमे साई ने भुलाया है,

चाहे गद्दी रुके चाहे तूफ़ान चले चाहे बदल उड़े चमके बिजली भले,

बैठेगे न हिमत हार हमे साई ने भुलाया है,

रोके न हमे संसार हमे साई ने भुलाया है,

माना मंजिल की और कठिन है रास्ता,

हम को साई के सिवा किस से क्या वसता,

है बहुत बड़ा उपकार हमे साई ने भुलाया,

रोके न हमे संसार हमे साई ने भुलाया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।