नाव भी तू मेरी तू ही मेरी पतवार भी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नाव भी तू मेरी तू ही मेरी पतवार भी है,

तू ही माझी है मेरा तू ही मझधार भी है,

क्यों फ़िक्र हो मुझे मेरी तू फ़िक्र करता है,

मेरी चिंता मेरी सारी बलाये हरता है,

तू ही रक्षक है मेरा तू ही पालनहार भी है,

तू ही माझी है मेरा तू ही मझधार भी है,

नाव भी तू मेरी तू ही मेरी पतवार भी है,

मुझे रिश्ते सभी तुझ में ही नजर आते है,

तुझमे माँ पिता बंधू सखा मिल जाते है,

साथ तू ही जगत में और जग के पार भी है,

तू ही माझी है मेरा तू ही मझधार भी है,

नाव भी तू मेरी तू ही मेरी पतवार भी है,

क्यों भला मैं डरु आती है मौत आ जाये,

छूट कर प्राण मेरे तुझमे मिल जाये,

तू ही श्रिस्ति का सिरजन तू ही संगार भी है,

तू ही माझी है मेरा तू ही मझधार भी है,

नाव भी तू मेरी तू ही मेरी पतवार भी है,

मुझे मालूम है कण कण में तू समाया है,

जीव नीर जीव में तेरी ही छाया है,

तुहि जीवन है तू ही ज़िंदगी का सार भी है,

तू ही माझी है मेरा तू ही मझधार भी है,

नाव भी तू मेरी तू ही मेरी पतवार भी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।