दस मेरे मालका

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॥ पावन पाठ ॥

दस मेरे मालका कोई एहो जेहि था,

बेठी तने जिथे तेरा भजन करा ।॥

जिथे कोई दुनिया दा शोर ना होवे,

तेरे बिन मालका कोई होर ना होवे,

नाम हवा ते मैं तेरा ही सुना,

जिथे........

पंज लुटरे मिंजो रोज ही लुट दे,

लूटना चाहंदे मिंजो विच जग दे,

एहना दा मुकाबला कइया मैं करा,

दस मेरे मालका......

कट के चोराशी चोला पाया प्रभु जी,

किसी भी कम नही आया प्रभु जी,

चल दियां सांसा नाम तेरा जपा,

दस मेरे मालका....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।