श्री प्रसाद गिरी तुम हो सिद्ध

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

श्री प्रसाद गिरी तुम हो सिद्ध,

श्री जग ने जाना तेरी चौखट पे झुकता जमाना,

आकर चरणों सिर को झुकाये,

हर कोई अपनी मुरादे पाये ,

तू है बाबा मेरा नाम लूंगा तेरा रक्षा करना.,

इनकी चोखट पे.....

बिटिया बिमला की लाज बचाई,

जिंदा पति कर हुए तुम समाई ,

साधु दस बना मान पाया घाना जग ने जाना,

इनकी चोखट पे.....

सच्चे मन से करे जो तेरा बंदन,

धूल चरणों की बन जाये चंदन,

ये जग अज्ञान बड़ा नादान है दर्स दिखाना ,

इनकी चोखट पे.....

श्री प्रसाद गिरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।