जब से पकडे चरण

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॥ पावन पाठ ॥

जब से पकडे चरण साई के मन भूधि को छोड़ दिया,

खुद को करके उसके अर्पण अपनी खुदी को छोड़ दिया,

जब से पकडे चरण साई के मन भूधि को छोड़ दिया,

साई शरण की मस्ती देखो चारो और खुमारी है,

इस संगत का हर मतवाला साई की जिमेदारी है,

जिसने देखा घर साई का अपनी गली को छोड़ दियां,

खुद को करके उसके अर्पण अपनी खुदी को छोड़ दिया,

जब से पकडे चरण साई के मन भूधि को छोड़ दिया,

सब सोचत है हम साई से मिलने मिलाने आये है,

हम जानत है इसी बहाने जान चढ़ाने आये है,

इस कारण से हर जंगल को हर बस्ती को छोड़ दिया

खुद को करके उसके अर्पण अपनी खुदी को छोड़ दिया,

जब से पकडे चरण साई के मन भूधि को छोड़ दिया,

यहाँ कोई कमजोर नहीं है यहाँ कोई मजबूर नहीं,

चलते जाना फ़र्ज़ निभाना मंजिल अपनी दूर नहीं,

बीच सफर में रह जायेगा जिसने जी को छोड़ दिया,

खुद को करके उसके अर्पण अपनी खुदी को छोड़ दिया,

जब से पकडे चरण साई के मन भूधि को छोड़ दिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।