रंग लाइ है बर्बरीक तेरी क़ुरबानी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रंग लाइ है बर्बरीक तेरी क़ुरबानी,

आज घर घर में पूज रहा है शीश के दानी,

आया तेरा ज़माना कलयुग का वरदानी,

आज घर घर में पूज रहा शीश के दानी,

कहानी है तेरी ज़माने से जुदा,

तेरे जैसा कोई न हुआ न होगा,

याद है आज भी तेरी वो दासता,

तेरे तरकश में रखे तीन बाणो का समां,

सारे पते छीजेरे तेरे एक बाण से,

देखते शाम रहे तुझे हैरान से,

कहानी ने यही से मोड़ लिया बलदानी,

आज घर घर में पूज रहा शीश के दानी,

रंग लाइ है बर्बरीक तेरी क़ुरबानी,

देख के तेरा बल श्याम ने सोच लिया,

ये मचाये गा केहर इस ने जो युग किया,

रहे गा ये सदा हार होती है जिधर,

आज होगा इधर तो कल होगा उधर,

यही चलता रहो तो होगी मुश्किल बड़ी,

कुछ तो करना पड़े गा है मुझे इस गड्डी,

तब तेरा शीश मांगने श्याम ने ठानी,

आज घर घर में पूज रहा शीश के दानी,

रंग लाइ है बर्बरीक तेरी क़ुरबानी,

दकक्षणा शीश की मांग ली श्याम ने,

हाथ में शीश था श्याम के सामने,

श्याम ने वर दिन ओ प्यारे बर्बरीक,

मेरे ही नाम से होगी पूजा तेरी,

पूजे गा कलयुग में बर्बरीक तू घर घर,

ना रहेगा कोई तुझसे फिर बे खबर,

ये वचन सच हुआ कहता है बगड़ा,

आज घर घर में पूज रहा शीश के दानी,

रंग लाइ है बर्बरीक तेरी क़ुरबानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।