मेरे साईं नु समज ये आइयाँ

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे साईं नु समज ये आइयाँ रमज़ा इश्क दिया,

हर किसे नु न समज आइयाँ रमज़ा इश्क दिया,

इश्क इश्क ता हर कोई करदा,

इश्क दा भेद ना जाने कोई,

रमज़ा इश्क दियां,

किसे नु न समज आइयाँ रमज़ा इश्क दिया,

अपनी अपनी दसे कहानी,

जिस तन लगियां ओही जाने,

अल्लहा मेरे मोला,

इश्क चडोनदा सूली यारो,

किसे नु न समज आइयाँ रमज़ा इश्क दिया

मस्ती दे विच हर पल रहंदा,

जीहने इश्क प्याला पीता,

इश्क नचोंदा यार दे वेहड़े करदा है मन्हैयाँ,

रमज़ा इश्क दियां......

इश्क च सहनु रब मिल जांदा मन हॉवे ये सचा,

पैरा दे विच पाके गुन्गुरु नच नच रब नु मनाना,

रमज़ा इश्क दियां....

इश्क न देखे जात पात नु,

इश्क दे खेल अवले,

अकला नाल काम औंदियाँ,

कर दिंदा है झले,

रमज़ा इश्क दियां....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।