झुला डरे हैं अमुवा की डाल पे माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झुला तो पड़ गए अमुवा की डाल पे माँ,

झुला डरे हैं अमुवा की डाल पे माँ,

झूले मोरी मैया, अमुवा की डाल पे माँ।

काहे को मैया को बनेयो हिंडोरा,

काहे की लागी डोर मोरी मैया,

अमुवा की डाल पे माँ।

चन्दन पाठ को बनो हिंडोरा,

रेशम लागी डोर मोरी मैया,

अमुवा की डाल पे माँ।

कौन झुलावे, कोना झूले

कौन खेंचे डोर मोरी मैया,

अमुवा की डाल पे माँ।

मैया झूले, लंगरे झुलावे

हनुमत खेंचे डोर मोरी मैया,

अमुवा की डाल पे माँ।

पांच भगत माई, तोरे यश गावे,

चले पवन झकजोर मोरी मैया,

अमुवा की डाल पे माँ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।