शिरडी तुम्हारे अंदर है

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॥ पावन पाठ ॥

शिरडी तुम्हारे अंदर है तुम दिल के अंदर देखो तो,

वो पास खड़ा मिल जायेगा,

खुद अपने से मिलवायेगा,

शिरडी तुम्हारे अंदर है तुम दिल के अंदर देखो तो,

हर भोज उतर ता जायेगा,

हर पल साई का जाप करो,

ना पड़े जरुरत कहने की,

जो करना है अपने आप करो,

जब आ पहुंचे हो बाहर तक,

तो अंदर का घर देखो तो,

वो पास खड़ा मिल जायेगा,

खुद अपने से मिलवायेगा,

शिरडी तुम्हारे अंदर है तुम दिल के अंदर देखो तो,

ये मार्ग है जिसको शरधा की कलियों से सजाना पड़ता है,

कुछ खुद भी जागना पड़ता है,

ओरो को जगाना पड़ता है,

दुनिया में रह कर देख चुके दुनिया से हट कर देखो तो ,

वो पास खड़ा मिल जायेगा,

खुद अपने से मिलवायेगा,

शिरडी तुम्हारे अंदर है तुम दिल के अंदर देखो तो,

तुम जिसको खोज ते उसकी पहचान जरुरी होती है,

लेकिन हर खवाइश राही की विश्वाश से पूरी होती है,

सिर्फ एक किनारा कुछ भी नहीं तुम सारा समंदर देखो तो,

वो पास खड़ा मिल जायेगा,

खुद अपने से मिलवायेगा,

शिरडी तुम्हारे अंदर है तुम दिल के अंदर देखो तो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।