है गुलशन में तू है बहारो में तू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

है गुलशन में तू है बहारो में तू,

मेरे श्याम चाँद और सितारों में तू ,

है पर्वत पे धरती पे आकाश में आकाश में,

तू हर दिल की धड़कन में हर सांस में हर सांस में,

है नजरो में नजारो में तू,

मेरे श्याम चाँद और सितारों में तू ,

है भजनो में ग़जलों ने हर गीत में तू हर गीत में,

तू हारे का साथी है तू हर जीत में,

यह भगतो के प्यारे जय कारो में तू,

मेरे श्याम चाँद और सितारों में तू ,

नगीने में नग में तेरा नूर है तेरा नूर है,

तू कण कण में रहता नहीं दूर है,

एह हीरे में मोती में हारो में तू,

मेरे श्याम चाँद और सितारों में तू,

जहा जोत जलती वही श्याम वही श्याम है,

भक्तो के दिल में तेरा धाम है,

है भोली कहे हज़ारो में तू,

मेरे श्याम चाँद और सितारों में तू ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।